
महाराष्ट्र में Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) elections से ठीक पहले सियासी पारा अचानक चढ़ गया है।
इस बार विवाद की जड़ बने हैं Tamil Nadu BJP president K. Annamalai, जिनके एक बयान ने मराठी अस्मिता की बहस को फिर से हवा दे दी है।
Election campaign के दौरान Annamalai ने मुंबई को “International City” बताते हुए कहा कि
“Mumbai किसी एक राज्य की नहीं, बल्कि पूरे देश और दुनिया की है।”
Raj Thackeray का तीखा पलटवार: ‘मराठी मानुस का अपमान’
Annamalai के इस बयान को MNS chief Raj Thackeray ने सीधे तौर पर ‘मराठी मानुस’ का अपमान बताया। एक rally में Raj Thackeray ने न सिर्फ Annamalai पर हमला बोला, बल्कि उनका मज़ाक उड़ाते हुए उन्हें ‘रसमलाई’ कह दिया।
यहीं नहीं, Raj Thackeray ने 1960 के दशक का विवादित नारा ‘हटाओ लुंगी, बजाओ पुंगी’ दोबारा दोहराया—एक ऐसा नारा, जो कभी Bal Thackeray द्वारा दक्षिण भारतीयों के खिलाफ इस्तेमाल किया गया था।
‘सामना’ Editorial में भी Annamalai पर हमला
Shiv Sena (Uddhav faction) के मुखपत्र ‘सामना’ ने भी अपने editorial में Annamalai को आड़े हाथों लिया।
सामना में लिखा गया— “कोई भी ऐरा-गैरा, लुंगी-सुंगी मुंबई आता है, महाराष्ट्र के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाकर चला जाता है।”
Editorial में BJP पर आरोप लगाया गया कि सत्ता और धन के लालच में मराठी अस्मिता के अपमान को नजरअंदाज किया जा रहा है, और मंच पर मौजूद मराठी BJP नेताओं ने भी Annamalai के बयान पर आपत्ति नहीं जताई।
Aditya Thackeray का हमला: ‘BJP सिर्फ लूटना चाहती है’
Shiv Sena (UBT) नेता Aditya Thackeray ने भी Annamalai पर निशाना साधते हुए कहा— “उनके बयान दिखाते हैं कि BJP मुंबई और महाराष्ट्र को सिर्फ बेइज्जत करना और लूटना चाहती है।”

Aditya Thackeray ने यह भी कहा कि अन्नामलाई “Tamil Nadu में खुद चुनाव नहीं जीत पाए, अपनी security deposit तक नहीं बचा सके।”
उन्होंने Tamil Nadu CM MK Stalin की तारीफ करते हुए BJP नेताओं पर सिर्फ झगड़े और गालियां देने का आरोप लगाया।
Annamalai का जवाब: ‘धमकियों से नहीं डरता’
विवाद बढ़ने के बाद K. Annamalai ने भी aggressive counter-attack किया। Raj और Aditya Thackeray को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा— “मैं एक किसान का बेटा हूं, धमकियों से नहीं डरता। मैं मुंबई आ रहा हूं, हिम्मत है तो मेरे पैर काटकर दिखाओ।”
Annamalai ने आरोप लगाया कि ठाकरे परिवार regional sentiments भड़काकर अपनी political relevance बचाने की कोशिश कर रहा है।
BMC Election में क्यों अहम है यह विवाद?
Political analysts मानते हैं कि BMC चुनाव से पहले मराठी अस्मिता बनाम national narrative, North–South politics, Outsider vs Insider debate एक बार फिर मुंबई की राजनीति के केंद्र में आ गया है।
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